गाजियाबाद का तेजी से विकसित होता इलाका—राजनगर एक्सटेंशन—आज एक ऐसे विरोधाभास का उदाहरण बन चुका है, जहां निवासी वर्षों से टैक्स तो भर रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी तरस रहे हैं। करोड़ों का टैक्स, लेकिन हिसाब कहाँ? पिछले एक दशक से अधिक समय से गाजियाबाद नगर निगम लगातार यह तर्क देता आया है कि राजनगर एक्सटेंशन का पूर्ण हस्तांतरण गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से नहीं हुआ है, इसलिए वह यहां विकास कार्य करने में असमर्थ है। लेकिन सवाल यह है— 👉 जब हस्तांतरण नहीं हुआ, तो टैक्स किस आधार पर वसूला गया? 👉 करोड़ों रुपए का हाउस टैक्स आखिर किस क्षेत्र में खर्च हुआ? 👉 क्या इस क्षेत्र के निवासी केवल “रेवेन्यू जनरेटर” बनकर रह गए हैं? 🚧 मूलभूत सुविधाओं का अभाव राजनगर एक्सटेंशन की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है ❌ सड़कों की हालत बद से बदतर ❌ नियमित सफाई व्यवस्था का अभाव ❌ हरित पट्टी, पार्क और डिवाइडर पर पेड़-पौधों की कमी ❌ सार्वजनिक सुविधाएं जैसे डिस्पेंसरी, डाकघर, कम्युनिटी हॉल नदारद क्या यही है “स्मार्ट सिटी” की परिकल्पना? 🏪 विकास या व्यावसायिक लालसा? सूत्रों के अनुसार, नगर निगम अब इस क्षेत्...