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राजनगर एक्सटेंशन की सड़कों का दर्द – आखिर कब जागेगा प्रशासन?

राजनगर एक्सटेंशन…
एक ऐसा क्षेत्र, जहाँ हजारों परिवार अपने सपनों का घर लेकर आए थे।
लेकिन आज वही सपना टूटी सड़कों, बिखरे कूड़े और लापरवाही के बोझ तले दबता जा रहा है।
हाल ही में सामने आई खबरें भी यही बताती हैं कि यहाँ की सड़कें वर्षों से बदहाल हैं और लोग लगातार परेशान हो रहे हैं।

क्या यही विकास है?
क्या हमारे जनप्रतिनिधि बताएंगे—क्या गड्ढों से भरी सड़कें ही विकास की पहचान हैं?
क्या सड़क पर फैला कूड़ा हमारी व्यवस्था की सच्चाई नहीं दिखाता?

क्या हजारों परिवारों की रोज़मर्रा की परेशानी किसी की प्राथमिकता नहीं है?

जब हर चुनाव में “विकास” के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं,
तो फिर राजनगर एक्सटेंशन की सड़कों की यह हालत क्यों?

कूड़ा क्या बताता है?
सड़क पर पड़ा कूड़ा सिर्फ गंदगी नहीं है,
यह बताता है—
व्यवस्था की लापरवाही
सफाई तंत्र की विफलता
और जिम्मेदारों की चुप्पी
जहाँ कूड़ा बिखरा हो,
वहाँ बीमारी, बदबू और असुविधा अपने आप आ जाती है।
क्या यही माहौल हम अपने बच्चों के लिए चाहते हैं?

जनप्रतिनिधियों से सीधे सवाल
वार्ड मेंबर जी,
क्या आपने कभी इन सड़कों पर चलकर देखा है?

विधायक जी,
क्या आपको पता है कि रोज़ लोग इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं?

सांसद जी,
क्या यह क्षेत्र आपके विकास के नक्शे में शामिल है या सिर्फ चुनाव के समय याद आता है?

अब जवाब चाहिए, आश्वासन नहीं
अब समय आ गया है कि—
सड़कों का तुरंत पुनर्निर्माण हो
नियमित कूड़ा उठान सुनिश्चित हो
और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
क्योंकि यह कोई एहसान नहीं,
यह हमारा अधिकार है।

राजनगर एक्सटेंशन के निवासियों की ओर से
एक मर्मिक अपील—
👉 हमें वादे नहीं, विकास चाहिए
👉 हमें भाषण नहीं, साफ सड़कें चाहिए
👉 हमें इंतजार नहीं, तुरंत कार्रवाई चाहिए







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